SAMPARK YA SAMJHOUTA (COMMUNICATE OR COMPROMISE)

May 13 2008  | Views 103 |  Comments  (3)
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संपर्क या समझौता!!!

एक दूजे का साथ पाकर
अग्नि को साक्षी मानकर
पुरुष और स्त्री लेते वचन
प्यार और विश्वास से सींचते बंधन
मुश्किल है पर नही असंभव
लेकर अलग सोच, अलग स्वभाव

सद्बुद्धि का उपयोग करें अगर
स्वच्छ मन से जुट जाएँ अगर
संपर्क बनाए रखें अगर
आसान हो जाती है जीवन की डगर
देखते है कई रिश्ते पनपते हुए
संपर्क को समझौता का रूप लेते हुए

समझौता एक ऐसा आँचल
जिसकी आड़ में होते कई छल
अहंकारी पुरुष मानते अपना अधिकार
स्त्री से अपेक्षा, समझौता का बार बार
परंपरा के नाम से छलते बार बार
स्त्री ने अपनाए अलग ही आधार
सामना किए बिना पीछे से करती वार

आदि हो गये बहुत, समझौते के जीवन की
सामना ना कर आँख मिचोली खेलनी की
दिलों के बंधन मैं बँध कर भी
नही है हिम्मत दिलों को देखनी की
कुछ लोग ऐसे जो ना ही समझौता चाहते
ना ही संपर्क बनाना, मन में चाहते
कुछ, दुनिया को कुछ और दिखाते
दूसरों को कुचलना ही चाहते
तो कुछ ऐसे जो साथ चलना चाहते
पीछे से वार वो करना नही चाहते
संपर्क बनाने की कोशिश वो करते
तो अक्सर कुचल दिए जाते

बहुत कम है ऐसे जो,
संपर्क को वास्तव में समझते है
एक दूसेरे की महत्वता को जानते है
संपर्क उनके लिए, जो चलते यह मानते हुए
देना सबको सम्मान, यह जानते हुए
बसाते जीवन कंधे से कंधा मिलाते हुए
संवारते जीवन की डगर, ऐसे बहुत नही
संपर्क संपर्क है समझौता नही!!!

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